तुम जो थे वो आज नहीं,
मै भी अब वो नहीं, क्योंकि तुम तुम नहीं।
बचपन में तुम जो थे, वो तुम रह ना सके,
उस बेबाकी को तुम्हारे आस पास के लोग सेह ना सके।
तुमने सोचा, इनमे है मुझसे ज़्यादा समझदारी,
क्यों न मैं भी सीख लू थोड़ी दुनियादारी।
बड़ा पाठ पढ़ाया इस संसार ने,
जो बचा था वो सिखा दिया दिल के संहार ने।
अब खुशी औरों में ही ढूंढोगे न तुम,
क्योंकि तुम तुम नहीं।।
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